परिचय

15years

बच्चों की अपनी दुनिया होती है, अपना चिंतन होता है और अपनी भावनाएँ होती हैं. इसी भाव-जगत में बच्चा अपने भविष्य की बुनियाद रचता है. उसके आसपास का वातावरण, उपलब्ध ज्ञान व सूचनाएँ, मानवीय सम्बन्ध और जन्मजात संस्कार इस प्रक्रिया में उसके आधार तत्त्व बनते हैं. प्रत्येक बच्चे के लिए इन आधार तत्वों का अलग अर्थ और अलग महत्त्व होता है. इस अर्थ और महत्ता को परिभाषित करने में साहित्य का सबसे अधिक योगदान होता है.


इसी विचारधारा से प्रेरित है बाल पत्रिका ‘बच्चों का देश’. बाल-साहित्य को अन्य किसी भी साहित्य से अधिक जिम्मेदार होने की अपेक्षा होती है क्योंकि वह एक सम्पूर्ण जीवन को, एक पीढ़ी को प्रभावित करता है. अतः एक सफल बाल-साहित्य के लिए आवश्यक है कि वह बाल-मनोविज्ञान की कसौटी पर खरा उतरे. ‘बच्चों का देश’ पत्रिका इस दिशा में सलक्ष्य प्रयासरत रह कर बाल-मन के अनुकूल वह समस्त सामग्री देने को उद्यत रहती है जो मनोरंजन के साथ ही बच्चों के संतुलित व्यक्तित्व विकास में सहयोगी बन सके.


15 अगस्त, 1999 को प्रारम्भ हुई यह पत्रिका निरन्तर व नियमित प्रकाशन के साथ आज भारत की प्रमुख बाल-पत्रिका के रूप में स्थापित हो चुकी है. देश के कौन-कौन में फैले बाल-पाठक इसका बेसब्री से इंतज़ार करते हैं. अभिभावक और शिक्षक भी इसे बच्चों के संस्कार-निर्माण का सशक्त माध्यम मानते हैं और इससे भावनात्मक रूप से जुड़े हैं.